
इस देश का दुर्भाग्य है कि इस देश में कुछ हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी इस देश के नेता नहीं लेते,सिर्फ क्रेडिट लेना होता है तो बड़े बड़े पोस्टर बैनर छपते हैं जनता के पैसों का दुरुपयोग देखने को मिलता है,देश बात करता है विश्वगुरु बनने कि जो एक पेपर अच्छे से नहीं करा सकता,इसी कड़ी में
मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है।ऐसा नहीं है कि सिर्फ ऐसी घटना मध्यप्रदेश में पहली बार हुई है कितने बच्चों के अपनी जान गंवा दी,लेकिन इस देश का दुर्भाग्य है कि जनता का ही खाते हैं जनता को ही बजाते हैं डॉक्टर बनने का सपना देख रही NEET अभ्यर्थी
आकांक्षा चतुर्वेदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली,परिवार का आरोप है कि NEET परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद से वह गहरे मानसिक तनाव में थी,आकांक्षा को उम्मीद थी कि इस बार उसके करीब 650 अंक आएंगे और मेडिकल कॉलेज में चयन हो जाएगा,लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने उसे अंदर से तोड़ दिया। घटना के बाद मिले सुसाइड नोट ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। छात्रा ने लिखा,सॉरी मम्मी-पापा आपको भरोसा था कि आपकी बेटी डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब मुझमें दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है। मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया।बच्चे जान दे रहें हैं सरकार बार बार दावे कर रही हैं लेकिन सवाल ये उठता है कि इन सब का जिम्मेदार कौन है,जिस परिवार के बच्चों ने अपनी जान सरकार के सिस्टम के नाते जान दी है उसको इंसाफ इस देश में मिल पाएगा ये बड़ा सवाल है,

