कोरबा । कोरबा जिले में भैसमा तहसील अंतर्गत ग्राम पतरापाली के आदिवासी किसानों के जमीन को कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा बेनामी खरीद के जरिए कब्जा करने की कोशिश के खिलाफ गांव के लोगों ने आज यहां तानसेन चौक से रैली निकालकर जिलाधीश कार्यालय पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा ने किया। डिप्टी कलेक्टर टी आर भारद्वाज ने किसानों की समस्या को सुना और ज्ञापन लेते हुए जांच करने हेतु गांव में शिविर लगाने का आश्वासन दिया।उल्लेखनीय है कि ग्राम पतरापाली एक आदिवासी बहुल गांव हैं और लगभग सभी आदिवासी या तो निरक्षर है या बहुत कम पढ़ें लिखे हैं। उन्हें भूमि कानूनों के संबंध में उनकी जानकारी बहुत कम है, जिसका फायदा, उनकी जमीन को हड़पने के लिए, प्रभावशाली तबके के कई लोग उठा रहे हैं। किसान सभा के इस प्रदर्शन में शामिल घसिया राम पिता दौलतराम, पुनिराम पिता करन सिंह, राजेश पिता गेदाराम, तिजराम पिता घसीराम, भूखनराम पिता लोहरी, मिलक राम पिता उजित राम, धनीराम पिता भालेराम, जीवन सिंह पिता घसिया राम, चमरा सिंह पिता नेतराम, महेत्तर पिता तिजराम आदि ने बताया कि वे पतरापाली गांव के निवासी हैं। खेती-किसानी ही इनकी आजीविका का साधन है और अपने पूर्वजों से प्राप्त जमीन पर वे खेती कर रहे हैं। वे अपनी जमीन पर आज दिनांक तक काबिज है। लेकिन पिछले एक माह से शहरों के कुछ लोग उनके गांवों में आकर उनकी कृषि भूमि को अपना बता रहे हैं। वे इस जमीन के पंजीयन के कुछ कागजात भी दिखा रहे हैं और उन पर अपनी जमीन छोडऩे का दबाव बना रहे है या फिर उन्हें बेदखल करने की धमकी दे रहे हैं। वे इन लोगों को पहचानते तक नहीं है। इन ग्रामीणों ने बताया कि ये बाहरी लोग वर्ष 1990 में ही उनके पूर्वजों से उनकी जमीन खरीदने का दावा कर रहे हैं। मामला तब गंभीर हो गया, जब ऐसे ही एक मामले में एक गैर-आदिवासी ने सगे भाईयों मंगल सिंह और भूखन लाल पिता लोहरी को उसकी जमीन से बेदखल करके और उस जमीन पर घेरा डालकर कब्जा कर लिया। इसके बाद सभी आदिवासी अपनी जमीन से जबरन बेदखली की आशंका से डरे हुए हैं।छत्तीसगढ़ किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रशांत झा, जिला सचिव दीपक साहू, सीटू के राज्य महासचिव एस एन बनर्जी आदि ने बताया कि ऐसा ही एक प्रकरण वर्ष 1999 में सामने आया था, जिसमें न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी कोरबा ने यह पाया था कि गैर कानूनी तरीके से आदिवासी भूमि को गैर आदिवासी को अंतरित किया गया था। न्यायालय ने प्रकरण क्रमांक 8/अ-23/99-2000 के जरिए पीडि़त आदिवासी के पक्ष में फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा कि सभी आदिवासियों के प्रकरण लगभग ऐसे ही हैं, जिनमें उनकी भूमि का 40-50 साल पहले विक्रय होना बताया जा रहा है, जबकि भूमि पर मूल भूस्वामी अभी तक काबिज है। ये सभी भूमि अंतरण बेनामी है और अवैध है, क्योंकि आदिवासी भूमि का किसी भी गैर-आदिवासी को अंतरण नहीं हो सकता। प्रशासन ने शिकायतों की जांच करने के लिए गांव में शिविर लगाकर भूमि स्वामित्व का निराकरण करने का आश्वाशन दिया। किसान सभा और सीटू ने आदिवासी किसानों के पक्ष में सकारात्मक कार्यवाही न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि केवल पतरापाली ही नहीं, आसपास के अन्य गांवों में भी आदिवासियों की जमीन सत्यापन किए जाने की जरूरत है।
What's Hot
Saturday, June 13
आदिवासियों की जमीन कब्जाने की कोशिशों के खिलाफ किसान सभा ने किया जबरदस्त प्रदर्शन, प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन
About Us
Editor & Publisher: Manoj Shukla
Co-Editor: Mohammad Shah Aalam
Office Address:
VV Vihar Colony, Street No. 07,
Mova, Raipur, Chhattisgarh – 492001
India
Important pages
© 2026 News India Live 36.

