कोरबा। केंद्र सरकार द्वारा पारित चार लेबर कोड के बाद सबसे अधिक हालचाल फिलहाल कोल सेक्टर में देखी जा रही है। कोयला उद्योग में कार्यरत मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) को छोडक़र एचएमएस, एटक, इंटक और सीटू लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। 9 फरवरी 2026 को आयोजित देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर कोयला क्षेत्र में भी देखने को मिला था। मजदूर संगठनों का कहना है कि चार लेबर कोड लागू होने से कोयला उद्योग की मौजूदा श्रमिक व्यवस्था और कई महत्वपूर्ण कमेटियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। जेबीसीसीआई के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। श्रमिक संगठनों के अनुसार, चार लेबर कोड में कहीं भी जेबीसीसीआई (ज्वाईट बाएसटीइट कमेटी फॉर कोल इंडस्ट्री) की बैठक या उसकी व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में जेबीसीसीआई के स्थान पर वार्ताकार परिषद का गठन किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत वही यूनियन परिषद में शामिल हो सकेगी, जिसे कम से कम 20 प्रतिशत मजदूरों का समर्थन प्राप्त होगा। 40 प्रतिशत समर्थन वाली यूनियन के दो प्रतिनिधि परिषद में शामिल होंगे।
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