
रायपुर,छत्तीसगढ़ में स्कूल खुल चुके हैं,लेकिन स्कूल में शिक्षक नहीं हैं,बिल्डिंग नहीं है, किताबें नहीं हैं,लेकिन इवेंट के लिए करोड़ो रुपए आ जाते हैं,देश की सरकार हो या प्रदेश की सरकार हो वादे और दावे तो बड़ी बड़ी करती हैं, लेकिन जमीनी हकीक़त कुछ और बयां करती हैं,देश और प्रदेश की शिक्षा,और स्वास्थ्य व्यवस्था खुद वेंटिलेटर पर हैं लेकिन एक दिन के ईवेंट के लिए सरकारों के पास बजट आ जाता है,अब सवाल उठता है कि देश की मीडिया ना तो देश के जिम्मेदारों से जनता की जरूरी सुविधाओं के लिए सवाल करती हैं और ना ही जनता की जरूरी सुविधाओं के लिए खबर चलती है,देश के नेता बच्चों को देश का भविष्य कहते हैं लेकिन सवाल उठता है देश का भविष्य गढ़ने के लिए स्कूल की छत तो होनी चाहिए ❓

