
छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में सड़क बनते ही उखड़ने लग जा रही है,पुल बन रहा है गिरने लग जा रहा है,अग्रेजों की बनाई सड़क,ब्रिज बिल्डिंग आजतक मौजुद हैं,इस समय देश में जो बन रहा है भ्रष्टाचार दिख रहा है,आखिर कब तक जनता धैर्य रखेगी,इसी कड़ी में बिलासपुर,कुरदर से उमरिया सरगोड़ तक बन रही 8 करोड़ 41 लाख 60 हजार रुपये की सड़क अब सिर्फ निर्माण कार्य नहीं,बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बनकर खड़ी हो गई है,ग्राउंड स्थल से जो तस्वीर निकल कर सामने आई है,वह सिर्फ निर्माण कार्य की खामियां नहीं दिखाती, बल्कि यह भी पूछती है कि आखिर करोड़ों रुपये के काम में जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार किसकी निगरानी में काम कर रहे हैं,मीडिया निरीक्षण में निर्माण स्थल पर न
इंजीनियर मिला,न सुपरवाइजर और न ही ठेकेदार का कोई प्रतिनिधि,सवाल यह है कि अगर करोड़ों रुपये का सरकारी
काम बिना निगरानी के चल रहा है तो क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर सब कुछ जानकारी में होने के बावजूद अनदेखा किया जा रहा है,या सबकी मिली भगत से ये सब हो रहा है,

