कोरबा। केंद्र में सत्तारूढ़ भारत सरकार ने बच्चों के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक अहम निर्णय लिया है। अब स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की सिर्फ सामान्य स्वास्थ्य जांच ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) और ब्लड शुगर स्तर की भी नियमित जांच की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों और मानसिक समस्याओं की पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करना है.सरकार के इस फैसले के तहत देशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में हेल्थ स्क्रीनिंग कार्यक्रम को और व्यापक बनाया जाएगा। इसमें बच्चों के व्यवहार, तनाव, चिंता और अवसाद जैसे मानसिक पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही, बढ़ते लाइफस्टाइल बदलाव को देखते हुए डायबिटीज जैसी बीमारियों की शुरुआती जांच भी की जाएगी, ताकि समय रहते रोकथाम की जा सके.विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, पढ़ाई का दबाव और डिजिटल स्क्रीन के अधिक उपयोग के कारण बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस पहल को प्राथमिकता दी है। स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्चों की काउंसलिंग भी की जाएगी, जिससे उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सके.
इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए स्कूलों में प्रशिक्षित हेल्थ वर्कर्स और काउंसलर्स की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के स्वास्थ्य मानकों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
सरकार का यह कदम न केवल बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक संतुलन को भी मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नियमित जांच से भविष्य में गंभीर बीमारियों के मामलों में कमी आ सकती है.
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Saturday, June 13
अब स्कूलों में बच्चों की होगी नियमित शुगर जांच
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