कामकाज शुरू कराने में जुटा प्रबंधन, आ रही दिक्कतें
कोरबा। गर्मी का मौसम आने और इस दौर में तेज रफ्तार से अंधड़ चलने के प्रभाव से पेड़ों की टहनियां टूटकर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को चौपट कर रही है। हाल में ही हुए ऐसे घटनाक्रम से जिले में दो से अधिक स्थानों पर 55 से ज्यादा बिजली खंभे धराशायी हो गए। इसके नतीजन बहुत बड़े हिस्से की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। वितरण कंपनी ने कुछ जगह व्यवस्था ठीक करने के लिए काम शुरू भी कर दिया है जबकि कुछ स्थानों पर चुनौतियां है।
जानकारी मिली कि दो दिन पहले आए अंधड़ ने कोरबा जिले में वितरण कंपनी के ग्रामीण संभाग के अंतर्गत चुनौतियां खड़ी कर दी। विकासखंड कोरबा के अंतर्गत भेलवाटार और चचिया क्षेत्र में पेड़ों के टूटकर विद्यालय लाईन और खंभे पर गिरने की घटना हुई। इसका असर यह हुआ कि संबंधित फीडर के अंतर्गत होने वाली विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। इसके जरिए जुड़े विद्युत उपभोक्ता रोशनी की सुविधा से वंचित हो गए। वहीं व्यवसायिक क्षेत्र पर भी इसका बुरा असर पड़ा। भेलवाटार से लेकर चचिया और इस पर आश्रित बिजली की आपूर्ति दो दिन बाद भी बहाल नहीं हो सकी। बताया गया कि इस इलाके में हजारों की संख्या में बिजली उपभोक्ता हैं जो अंधड़ से जुड़ी इस घटना के कारण सुविधा से वंचित रह गए। आसपास के उपकेंद्रों को लोगों ने इस बारे में अवगत कराया। बताया गया कि फाल्ट अगर छोटा होता तो इसे फौरी तौर पर बनाना आसान होता लेकिन समस्या बड़ी है। इसमें भी विद्युत खंभे के साथ-साथ केबल टूटने का मामला है। इसलिए एक बड़े क्षेत्र में नए सिरे से इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना होगा।
दूसरी ओर सबसे बड़ी समस्या कटघोरा विकासखंड के भिलाईबाजार क्षेत्र में है। जानकारी मिली कि अंधड़ में सबसे ज्यादा असर इस क्षेत्र में दिखाया। बिजली वितरण कंपनी के पास जो डेटा आया है उसके हिसाब से 50 जगह खंभे टूटने की घटनाएं हुई है। कई गांव इस वजह से बिजली आपूॢत की समस्या से जूझ रहे हैं। खास बात यह है कि पूरा क्षेत्र घनी आबादी का है। घरेलू और व्यवसायिक उपभोक्ताओं के सामने भीषण गर्मी के दौर में खंभे टूटने की घटना ने मुश्किलें पैदा कर दी है। दिन से लेकर रात की चैन गायब है। यहां तक कि अब गैर परंपरागत साधनों के उपयोग का विकल्प भी खत्म हो गया है, क्योंकि इनकी ज्यादातर निर्भरता बिजली पर है।
ठेकेदार बता रहे डीजल की किल्लत
वितरण कंपनी के पास दो क्षेत्रों में बिजली खंभे टूटने और विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी आई है। जहां कहीं आंशिक समस्या है इसे दूर करने के लिए प्रयास तेज कर दिया गया है। जबकि जहां समस्याएं ज्यादा हैं और मौके पर सामाग्री भिजवाने से लेकर कामकाज कराए जाने हैं उसके लिए मैनपावर के साथ गाडिय़ां चाहिए। ठेकेदार ने डीजल की व्यवस्था न होने का जिक्र किया है। कामकाज के संपादन करने में यह भी एक बाधा है। स्थिति सामान्य होने की प्रतीक्षा की जा रही है।
– एस.सोनी, कार्यपालन अभियंता, वितरण कंपनी ग्रामीण
इन्वर्टर और जनरेटर ने साथ छोड़ा
यह बात सही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी साधन संपन्न उपभोक्ताओं ने सुविधा के लिए अपने घर से लेकर प्रतिष्ठान में इन्वर्टर व जनरेटर की व्यवस्था कर रखी है। जहां तक इन्वर्टर का मामला है यह पूरी तरह से बिजली पर निर्भर है। चार्ज होने पर इसका अधिकतम बैकअप 10 से 12 घंटे का है। इसके बाद इसकी सेवाएं शून्य हो गई है। जबकि डीजल-पेट्रोल से चलने वाली जनरेटर खुद मुश्किल में है। क्योंकि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के अंतर्गत डीजल-पेट्रोल पंपों में इंधन की किल्लत है और आपूर्ति के लिए नियम कड़े कर दिए गए हैं। निगरानी सख्त है, इस पर जनरेटर की उपयोगिता को लेकर लोगों को सोचना पड़ रहा है।
Wednesday, May 20
अंधड़ का कहर, दो क्षेत्र में 55 से अधिक बिजली खंभे धराशायी, आपूर्ति ठप
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