भागलपुर, १४ मई ।
मानिक सरकार घाट मार्ग दो वर्ष में तीसरी बार ध्वस्त होने की घटना हुई। 80 मीटर लंबा हिस्सा गंगा नदी की ओर कटाव हुआ है। घाट मार्ग 10 फीट तक नीचे धंस गया है। इससे घाट किनारे बसे करीब 50 से अधिक मकान जद में आ सकते हैं।कई घरों व चारदीवारी में दरार आ गई है। मार्ग ध्वस्त होने से जहां आवागमन की समस्या है। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसके आवागमन के लिए रास्ता नहीं बचा है। जो रास्ता बचा है,उससे गहरा दरार है। जान जोखिम में डालकर लोग डरे-सहमे आवागमन करने को विवश हैं। घटना के बाद बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अधीक्षण अभियंता व कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने टीम के साथ निरीक्षण किया।दो से तीन दिनों में पूर्णिया से मुख्य अभियंता भागलपुर आकर घटना स्थल का निरीक्षण करेंगे। टीम ने माना कि नाले के पानी के निकास व गंगा के तट पर कटाव से धंसने व दरार की समस्या है। गंगा के पानी में जमीन खिसका है। ड्रेजिंग के कारण भी गंगा की गहराई बढ़ी है। अभी ईसी बैग नदी में डाला जा रहा है। इसके बाद घाट मार्ग तक स्लोप बनाकर जीओ बैग डाला जाएगा। जिससे काफी हद तक निदान हो जाएगा। 30 जून तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।मानिक सरकार घाट पर बुडको द्वार स्ट्राम वाटर ड्रेन के तहत अर्द्धनिर्मित नाला का निर्माण कराया। इस नाले के निकास व्यवस्था नहीं की गई। जिससे नाले में पानी जमा होकर रिसाव हो रहा है। इस कारण दरार की समस्या आ रही है। एक दशक पहले घाट किनारे शहर का कचरा गिराया गया था। इस कचरे के ढेर पर मार्ग का निर्माण व आवासीय कालोनी बसाया गया। जिससे भी तट के धसने की समस्या है। वहीं मोहल्ले के छोटे-बड़े नाले का निकास सीधे नदी में गिरता है। तटबंध ध्वस्त होने के उपरांत भी धड़ल्ले से भवन निर्माण के लिए फाउंडेशन का कार्य चल रहा है। जबकि पूर्व में जब तटबंध ध्वस्त हुआ था तो नगर आयुक्त ने स्थल निरीक्षण कर भवन निर्माण संबंधी दस्तावेज मांगा था।स्थानीय लोगों ने कागजात भी जमा किया। इसके बाद आगे की कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि उक्त जमीन निजी है।
इस समस्या को लेकर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की ओर से डीएम को पत्र लिखकर भवन निर्माण पर रोक लगाने का सुझाव देंगे। क्योंकि भविष्य में ऐसी घटना फिर होने की संभावना हो सकती है।मानिक सरकार घाट पर तटबंध के ध्वस्त होने के कारण सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पाइपलाइन को क्षति हुई है। ध्वस्त होने से 100 मीटर पाइपलाइन नदी की ओर करीब पांच मीटर खिसक गया। कई जगह पाइप तटवर्ती क्षेत्र में जमींदोज हो चुका है। इससे बरारी से साहेबगंज तक नाले का पानी को प्लांट तक पहुंचाना की कार्ययोजना पर फिलहाल व्यवधान हो गया। इसकी सूचना मिलने पर बुधवार को बुडको व अडानी के अभियंता ने घटना स्थल का जायजा लिया।टीम विचार कर रही है कि मलबा में दबे पाइप को निकाला जाए या नए सिरे से पाइपलाइन किया जाय। इस समस्या से नाले के पानी के शोधन पर असर पड़ेगा।मानिक सरकार घाट पर तटबंध व गार्डवाल निर्माण को लेकर अपनी ओर से कवायद की। इसके लिए भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज को करीब एक लाख रुपये शुल्क जमा कर डिजाइन व प्राक्कलन तैयार करवाया था।कॉलेज ने करीब एक करोड़ रुपये का डीपीआर किया। जिसमें मजबूत गार्डवाल का प्रविधान किया गया था। तट पर नदी के जमीन के स्तर पर करीब नौ मीटर पायलिंग कर पिलर खड़ा करना था।

