नई दिल्ली 6 मई । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कणगम (टीवीके) ने मंगलवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 का है और टीवीके को 10 सीटें कम मिली हैं, लिहाजा पार्टी ने सदन में बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल से दो हफ्ते का समय देने की मांग की है। राज्यपाल से आमंत्रण मिलने के बाद विजय गुरुवार को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विजय को चुनावों में जीत पर बधाई दी, जिस पर उन्होंने दोनों को धन्यवाद दिया। चुनावों में चौंकाने वाली जीत हासिल करने के बाद विजय मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पहुंचे और नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक की। पीटीआई के अनुसार, बैठक में विजय ने विधायक दल के नेता के चुनाव, सरकार गठन और विधानसभा में विधायकों के आचरण पर मंथन किया।
टीवीके नेता नांजिल संपत से जब पूछा गया कि पार्टी बहुमत कैसे हासिल करेगी, तो उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख इस मामले को सुलझा लेंगे। इससे पहले पार्टी मुख्यालय में उनका जोरदार स्वागत किया गया। वहां उन्होंने पेरियार ईवी रामासामी, बीआर आंबेडकर, के. कामराज, वेलू नाचियार और अंजलाई अम्माल को पुष्पांजलि अर्पित की। पार्टी इन सभी को अपना वैचारिक नेता मानती है। टीवीके को बहुमत के लिए 10 विधायकों की जरूरत है। आईएएनएस के अनुसार, सरकार बनाने के लिए टीवीके पीएमके, वामपंथी दलों और वीसीके जैसे छोटे दलों से समर्थन मांग सकती है। कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थन देने के संकेत दे दिए हैं। हालांकि द्रमुक के गठबंधन सहयोगियों एमडीएमके, वीसीके और डीएमडीके ने टीवीके से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है और वे समर्थन देने के इच्छुक नहीं हैं।
कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने बताया कि राज्य के चुनाव नतीजों पर एक विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस नेतृत्व को सौंपी गई है। आगे क्या करना है, इसका फैसला नेतृत्व मिलकर करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस के कई नेता समर्थन देने को तैयार हैं।वहीं, द्रमुक नेता टीकेएस एलनगोवन ने दावा किया कि टीवीके सिर्फ कांग्रेस के समर्थन से सरकार नहीं बना सकती। उसे अन्नाद्रमुक के समर्थन की भी जरूरत पड़ेगी, लेकिन उन्हें नहीं पता कि भाजपा ने अन्नाद्रमुक को क्या निर्देश दिए हैं।इससे पहले राज्यपाल ने एमके स्टालिन और उनकी मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। राज्यपाल ने स्टालिन से अनुरोध किया कि जब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक वह अपने पद पर बने रहें। चुनावों में मिली करारी हार के बाद स्टालिन ने मुख्यमंत्री पद इस्तीफा दे दिया था।
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