नेता प्रतिपक्ष हेमलता ने कहा विकास कार्यों पर सुध लें
एमसीबी। नगर पंचायत झगराखाण्ड में 8 मई को प्रस्तावित सामान्य सभा से पहले ही राजनीति गरमा गई है। परिषद के एजेंडा में ‘नारी शक्ति अधिनियम’ और महिला सशक्तिकरण को लेकर जन-जागरूकता अभियान शामिल किये जाने पर नेता प्रतिपक्ष श्रीमती हेमलता कोमल कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे विषय निश्चित रूप से स्वागत योग्य हैं लेकिन उससे पहले परिषद को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उनका आरोप है कि जिस परिषद में अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला पार्षद जनप्रतिनिधि के रूप में मौजूद हैं वहीं उनके वार्डों को विकास कार्यों से पूरी तरह वंचित रखा गया। हेमलता कोमल कुमार के अनुसार अधोसंरचना मद से प्राप्त लगभग 3 करोड़ रुपयों की राशि में विपक्ष की महिला पार्षदों के वार्डों में एक भी काम स्वीकृत नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली पार्षदों और तत्कालीन अधिकारियों ने अधिकांश राशि अपने-अपने वार्डों में केंद्रित कर ली। उन्होंने यह भी कहा कि करीब डेढ़ करोड़ रुपयों के कार्य भाजपा समर्थित वार्डों में शुरू हो चुके हैं जबकि शेष राशि को भी उन्हीं क्षेत्रों में खर्च करने की तैयारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के साथ ही भेदभाव हो रहा है तो ‘नारी शक्ति’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ की बातें कितनी सार्थक होंगी। नये सीएमओ की पदस्थापना के बाद अब नगरवासियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बची हुई राशि में क्या महिला पार्षदों के वार्डों को न्याय मिलेगा या फिर नारी सशक्तिकरण केवल कागजों और भाषणों तक ही सीमित रह जायेगा। अंत में नेता प्रतिपक्ष हेमलता कोमल कुमार ने स्पष्ट कहा कि जब तक महिलाओं को उनके अधिकार और समान विकास नहीं मिलेगा, तब तक नारी शक्ति की बात करना केवल औपचारिकता ही है।

