इंदौर, बीकानेर, राउरकेला के लिए सीधी सेवा की मांग हो रही अरसे से
कोरबा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन सहित रेलवे को हर साल 2000 करोड़ से ज्यादा का राजस्व देने वाले कोरबा के मामले में रेलवे का रूख अभी भी सकारात्मक नहीं हो सका है। एसईसीएल की कोयला खदानों से बेइंतहा कोयला लदान कर राजस्व कमाने पर उसका ध्यान टिका है। गिनती के ट्रेन कोरबा को दी गई है और प्रस्तावित ट्रेनों को लेकर अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी है, इससे लोग नाराज हैं।
कोरबा जिले में देश के विभिन्न राज्यों के लोग निवासरत हैं और इसलिए इसके साथ मिनी इंडिया का नाम चिपका हुआ है। औद्योगिक पृष्ठीभूमि वाले कोरबा जिले में एनटीपीसी, एसईसीएल, बालको, अदाणी पावर समेत कई उद्योग संचालित हैं जहां पर हजारों की संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और श्रमिक नियोजित हैं। अपने कार्यों से यात्रा के लिए इन लोगों को कोरबा स्टेशन से गिनती के ट्रेन उपलब्ध हैं, जबकि विभिन्न क्षेत्रों के लिए ट्रेनों की कनेक्टिविटी बिलासपुर और उसलापुर से होने के कारण लोगों के खर्चे बहुत ज्यादा हो गए हैं। काफी समय से कोरबा से इंदौर, राजस्थान के बीकानेर और हावड़ा दिशा में राउरकेला तक सीधी ट्रेन चलाने की मांग की जाती रही है। इसके लिए विकल्प मौजूद भी है लेकिन फिर भी रेलवे प्रबंधन उदासीन है। रेल संघर्ष समिति और नागरिक संगठन की ओर से कई मौके पर आंदोलन होने पर भी रेलवे का रूख उदासीन बना हुआ है। ऐसा लगता है कि कोयला लदान रोकने की प्रतीक्षा रेलवे कर रहा है।
घंटों खड़ी रहती हैं ट्रेन बिलासपुर में, फिर भी दिक्कत
रेल संघर्ष समिति के संयोजक रामकिशन अग्रवाल का कहना है कि बिलासपुर से इंदौर के बीच चलने वाली नर्मदा एक्सप्रेस को कोरबा से चलाने की मांग पूरी तरह व्यवहारिक है। यह लगभग 15 घंटे बिलासपुर में अनावश्यक खड़ी रहती है और इसके बाद इसे इंदौर के लिए रवाना किया जाता है। समय प्रबंधन के साथ इसे कोरबा से चलाने में कोई परेशानी है नहीं, इस बात को अधिकारी समझते हैं फिर भी मौन हैं। बीकानेर और राउरकेला के लिए कोरबा से सीधी ट्रेन चलाने के लिए न केवल कोरबा बल्कि अन्य राज्यों के सांसदों ने भी रेलवे से पत्राचार किया और मांग का समर्थन किया है। ये ट्रेनें चलती है तो छत्तीसगढ़ सहित तीन राज्यों के लोगों को सुगम आवागमन करने में आसानी होगी। अग्रवाल ने कहा हमने रेलमंत्री को भी इस बारे में अवगत कराया है।
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Saturday, June 13
लंबित ट्रेनें कोरबा को देने के मूड में नहीं रेलवे
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