नई दिल्ली। पेट्रो उत्पादों का निर्यात करने वाली कंपनियों को सरकार से कुछ राहत मिली है। डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगाये जाने वाले टैक्स (¨वडफॉल गेन टैक्स) को कम कर दिया गया है।
यह नई दर 1 मई 2026 से लागू हुई हैं। अब डीजल निर्यात पर टैक्स घटकर 23 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (एटीएफ) पर टैक्स घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर की गई है। पेट्रोल निर्यात पर टैक्स शून्य ही रहेगा। इस बारे में राजस्व विभाग ने 30 अप्रैल को अधिसूचना जारी की है।
सरकार ने लगाया टैक्स
सरकार एक निश्चित अंतराल पर विंडफाल गेन टैक्स लगा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होता है तो उसी आधार पर घरेलू तेल उत्पादक कंपनियों जैसे ओएनजीसी, ओआइएल, वेदांता को भी भुगतान होता है। साथ ही पेट्रो उत्पादों का भारत से बाहर निर्यात करने वाली कंपनियो को भी ज्यादा फायदा होता है।
इसलिए सरकार इन पर टैक्स लगा कर उसका समायोजन करती हैं। इससे पेट्रो उत्पादों की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलती है क्योंकि कंपनियों के लिए निर्यात से होने वाला मुनाफा कम हो जाता है।सरकार ने 26 मार्च को डीजल 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात टैक्स लगाया था।
उसे बाद में (11 अप्रैल को) डीजल पर 55.5 रुपये और एटीएफ पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। अब इन्हें काफी कम कर दिया गया है। घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल पर पहले वाला ही टैक्स रहेगा, इसलिए पेट्रोल पंप पर आम आदमी की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
अचानक नहीं होगी महंगाई
इससे देश में इनका स्टॉक और उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कहीं कमी या अचानक महंगाई नहीं होगी। इस फैसले से देश की बड़ी पेट्रोलियम कंपनियों को अब विदेश में डीजल और एटीएफ बेचने पर पहले जितना कम मुनाफा नहीं होगा, लेकिन टैक्स कम होने से उनका निर्यात थोड़ा आसान हो जाएगा।
सईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इस कारण निर्यात पर टैक्स लगाकर कंपनियों को विदेश भेजने से रोका गया था। अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से टैक्स की समीक्षा की गई और इसे कम कर दिया गया। हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा हो रही है।

