कोरबा। पाली विकासखंड के ग्राम महुआपानी में ग्रामीण पिछले दो दशकों से फ्लोराइड युक्त जल पीने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
ग्राम में जल समस्या अब केवल सुविधा का मुद्दा नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया की यहां वर्षों से उपयोग हो रहा जल फ्लोराइड से प्रभावित है, जिसके कारण कई लोग दांत और हड्डियों की बीमारियों से ग्रसित हो चुके हैं। बच्चों में दांतों का पीला पडऩा और बुजुर्गों में हड्डियों की कमजोरी आम बात हो गई है। हालत यह है कि एक तरफ ग्राम में जल की कमी बनी हुई है वहीं जो जल उपलब्ध है, वह बीमारी बांट रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक न तो स्वास्थ्य विभाग की नियमित जांच हो पाई है और न ही शुद्ध जल की स्थायी व्यवस्था की गई है। कुछ साल पहले लगाए गए फ्लोराइड फिल्टर प्लांट भी अब या तो बंद हैं या गायब हो चुके हैं। जिला चिकित्सा अधिकारी के अनुसार इस वर्ष कोरबा जिले के पांचों ब्लॉकों के 59 ग्राम फ्लोराइड प्रभावित घोषित किए गए हैं, जहां दांत और हड्डियों से जुड़े 237 मरीज चिन्हित किए गए हैं और उनका इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जहां भी सूचना मिलती है, वहां स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं। सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि जब समस्या वर्षों पुरानी है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया। क्या महुआपानी जैसे और भी ग्राम हैं जो प्रशासन की नजर से दूर हैं ? आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच का यह अंतर कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल महुआपानी के ग्रामीण आज भी शुद्ध जल की आस में मजबूरी में वही जल पी रहे हैं, जो धीरे-धीरे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है।
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Thursday, August 20
फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर है महुआपानी के ग्रामीण, हो रहे बीमार
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