ईरान। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने की बातचीत अभी चल ही रही है कि एक साथ कई बड़ी घटनाएं हो गई हैं. पहली बात यह कि ईरान में एक बड़ा हादसा हुआ जिसमें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानि IRGC के 14 जवान मारे गए. दूसरी बात यह कि IRGC ने अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया. और तीसरी बात यह कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया कि ईरान का नया प्रस्ताव उन्हें पसंद नहीं आया. यानी शांति की राह अभी भी बहुत मुश्किल है.
ईरान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में जंजान नाम का एक प्रांत है. वहां IRGC की एक टीम एक खास काम कर रही थी. यह काम था जमीन में दबे या पड़े हुए न फटे हुए बमों और गोले-बारूद को हटाना. इसे ‘ऑर्डनेंस क्लियरेंस’ कहते हैं. इस दौरान अचानक एक न फटा हुआ बम फट गया. इस धमाके में IRGC के 14 जवान मारे गए और 2 घायल हो गए. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने बताया कि उस इलाके में करीब 1200 हेक्टेयर खेती की जमीन पर बिखरे हुए न फटे बमों का खतरा है. यानी यह हादसा एक बड़ी चल रही समस्या का हिस्सा है
IRGC ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. पोस्ट में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने अपनी पुरानी नीति बदल दी है. पहले अमेरिका ‘दुनिया की ऊर्जा को काबू में रखने’ की नीति पर चलता था. लेकिन अब वो ‘बाधा डालने’ की नीति पर आ गया है. IRGC ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज की खाड़ी की नाकेबंदी इसी बाधा डालने की बड़ी योजना के तहत की है. इसका असली मकसद चीन, रूस और यूरोप को रोकना है. लेकिन IRGC का दावा है कि यह योजना 20 दिनों में ही नाकाम हो गई है. और अब ईरान उन देशों का केंद्र बन गया है जो अमेरिका की इस ‘बाधा डालने’ की नीति के खिलाफ हैं.
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गोला-बारूद को हटाते वक्त हुआ विस्फोट, 14 जवानों की मौत
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