धार, 0२ मई ।
ऐतिहासिक भोजशाला का धार्मिक स्वरूप निर्धारित करने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में नियमित सुनवाई जारी है। इस बीच, ब्रिटिशकालीन एक महत्वपूर्ण पुस्तक से नए तथ्य सामने आए हैं। ब्रिटिश इतिहासकार अर्नेस्ट बर्न्स द्वारा लिखित पुस्तक- ‘धार एंड मांडू’ में दर्ज विवरण से स्पष्ट होता है कि भोजशाला मूल रूप से हिंदू संरचना एवं शिक्षा का केंद्र रही, जिसे बाद में मस्जिद के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। तत्कालीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती इस पुस्तक के पृष्ठ 12 पर ‘राजा भोज का विद्यालय’ शीर्षक से लिखे लेख में उल्लेख है कि मौलाना कमाल-उद्दीन के मकबरे के पास स्थित यह स्थान स्थानीय हिंदू समाज में ‘राजा भोज का विद्यालय’ के रूप में जाना जाता था। यह तथ्य इस स्थल के शैक्षणिक महत्व को स्पष्ट करता है और परमार कालीन परंपरा से इसका संबंध जोड़ता है।1902 में प्रकाशित इस पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि वर्तमान में यह संरचना मस्जिद के रूप में दिखाई देती है, लेकिन इसके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री पुराने हिंदू भवनों से ली गई प्रतीत होती है। इससे संकेत है कि मस्जिद बनाए जाने से पहले यहां भव्य हिंदू मंदिर या शिक्षा केंद्र रहा होगा। इसके मेहराब और गुम्बद की सजावट को अन्य समकालीन इमारतों की तुलना में अधिक अलंकृत बताया गया है, जो इसकी प्राचीनता और विशेषता को दर्शाता है।उल्लेख है कि इस स्थल की ऐतिहासिकता को सर्पबंध स्तंभ शिलालेख और अधिक मजबूत करते हैं। 11वीं-12वीं सदी के नागरी लिपि में अंकित संस्कृत शिलालेखों में वर्णमाला, संज्ञा और क्रिया के विभक्ति रूप अंकित हैं। सर्प के आकार में बने इन शिलालेखों में कुल 53 अक्षर और कई व्याकरणिक रूप दर्ज हैं।
विशेषज्ञ इसे वर्णमाला आधारित शिलालेख मानते हैं, जो यह स्पष्ट करता है कि यहां व्यवस्थित शिक्षा दी जाती थी। इतिहासकारों के अनुसार, राजा भोज के समय धार विद्या और संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। ऐसे में इस स्थान का ‘राजा भोज का विद्यालय’ के रूप में उल्लेख इस बात को और बल देता है कि यहां पहले शिक्षा और धार्मिक गतिविधियां संचालित होती थीं, जिन्हें बाद में परिवर्तित कर मस्जिद का स्वरूप दिया गया।मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार, ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि भोजशाला पहले हिंदू संरचना और शिक्षा का केंद्र था, बाद में इसे तोडक़र मस्जिद का रूप दिया गया। यह साक्ष्य हमारे पक्ष को और मजबूत करता है। इस पुस्तक का प्रकाशन बंबई, सोसाइटी पुस्तकालय ने किया था।
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भोजशाला विवाद में नया ऐतिहासिक सबूत : ब्रिटिश इतिहासकार की पुस्तक में दावा- हिंदू शिक्षा का प्रमुख केंद्र था यह स्थल
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