जयपुर, १० मई ।
कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच दिन में प्रसव के बाद आठ प्रसूताओं की किडनी फेल (एक्यूट रीनल फेलियर) हुई है। इनमें दो प्रसूताओं की मौत हो होने के साथ ही छह की हालत गंभीर है। उच्च स्तरीय जांच में सामने आया कि चार मई को प्रसव के बाद प्रसूता पायल की किडऩी फेल हुई, जिससे पांच मई को उसकी मौत हो गई। फिर सात मई को प्रसूता ज्योति की किडनी फेल होने से मौत हुई। दो दिन में चार अन्य प्रसूताओं की किडनी भी फेल हो गई। अस्पताल प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही यह मानी जा रही है कि जिस ऑपरेशन थियेटर में चार से छह मई के मध्य छह महिलाओं किडनी फेल हुई, जिनमें से दो की मौत हो गई, उसी में छह मई की रात को दो अन्य महिलाओं का भी ऑपरेशन करवाया गया।इन दोनों महिलाओं की तबीयत बिगडऩे पर स्वजन उन्हें निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां पता चला कि दोनों की किडऩी फेल है। इनमें एक को वेंटिलेटर पर रखा गया है। उधर शनिवार को कांग्रेस ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आपरेशन थियेटर के प्रभारी निलंबित चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने ऑपरेशन थियेटर के प्रभारी डॉ. नवनीत शर्मा सहित एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। साथ ही संविदा पर सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. श्रद्धा को बर्खास्त करने के निर्देश दिए हैं। दो चिकित्सकों को कारण बताओं नोटिस दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त बाबूलाल गोयल पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच में सामने आया कि संक्रमण के कारण प्रसूताओं की किडऩी फेल हुई है। हालांकि, प्रशासन इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दे रहा है।
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कोटा के सरकारी अस्पताल में पांच दिन में आठ प्रसूताओं की किडनी फेल, अस्पताल प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही
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