कोलकाता, १० मई ।
इतिहास के पन्नों पर शनिवार को एक ऐसी इबारत लिखी गई, जिसकी कल्पना भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दशकों पहले की थी। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान ऐसे राजनीतिक क्षण का साक्षी बना, जिसकी गूंज केवल बंगाल तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज तक सुनाई दे रही है।करीब ढाई शताब्दी पुराने इस मैदान ने औपनिवेशिक शासन, कांग्रेस तथा वामपंथी युग और तृणमूल के उदय को देखा था-अब इसी धरती पर पहली बार भाजपा सरकार के गठन का औपचारिक उद्घोष हुआ। 74 साल में पहली बार बंगाल भगवा रंग में रंग गया। मालूम हो कि वर्ष 1952 के बाद राज्य में कांग्रेस, वामपंथी दल और तृणमूल कांग्रेस का ही शासन रहा है।ममता बनर्जी के अपराजेय होने के मिथक को दो बार तोडऩे वाले सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के नौवें और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी। राज्यपाल आरएन रवि ने सुवेंदु और पांच मंत्रियों को शपथ दिलाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और देश के 22 राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों से लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए के घटक दलों के सभी प्रमुख वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में सुवेंदु ने बंगाल की सत्ता की कमान संभाल ली।इसी के साथ श्याम प्रसाद मुखर्जी की धरती पर भाजपा राज शुरू हो गया। यह सिर्फ एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं था, बल्कि शक्ति प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुति और राजनीतिक संदेशों का संगम था। लाखों की भीड़ से भरे मैदान, भगवा झंडों की लहर, जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारों के बीच यह आयोजन एक जन-उत्सव में बदल गया।पीएम मोदी का वो भावुक सम्मान समारोह में मंच पर एनडीए का पूरा कुनबा मौजूद था। यह ²श्य भारतीय राजनीति में विरला माना जा रहा है, जहां एक राज्य के शपथ समारोह को राष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन का मंच बना दिया गया। प्रधानमंत्री का मंच पर पहुंचना भी अपने आप में प्रतीकात्मक था। खुले वाहन में सुवेंदु अधिकारी और राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य के साथ उनका जनता का अभिवादन स्वीकार करना एक स्पष्ट संदेश था-यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक आधार के विस्तार का उत्सव है। सबसे भावुक क्षण वह था जब प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के 98 वर्षीय वयोवृद्ध नेता माखनलाल सरकार के पैर छुए।
माखनलाल 1952 में श्याम प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर आंदोलन में जेल गए थे। प्रधानमंत्री ने उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया और पांव छूने के साथ गले लगाया, जो इस बात का प्रतीक था कि भाजपा अपने वैचारिक पुरोधाओं को कभी नहीं भूलती। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर आते ही सबसे पहले कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी, आज उनकी जयंती भी थी। इसके बाद उन्होंने ब्रिगेड में मौजूद लाखों की भीड़ की ओर मुख करके घुटनों के बल बैठकर जनशक्ति को प्रणाम किया। पीएम ने फेसबुक पर लिखा, मैं बंगाल की जनशक्ति के सामने सिर झुकाता हूं। यह बंगाल की उसी संस्कृति और अस्मिता को सम्मान था, जिसे चुनाव के दौरान विपक्ष ने मुद्दा बनाया था। एक ओर जहां विजय का उल्लास था, वहीं दूसरी ओर संघर्ष की यादें भी ताजा थीं। मैदान के एक हिस्से में शहीद वेदी बनाई गई थी, जहां उन भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने राजनीतिक हिंसा में अपनी जान गंवाई। शपथ के बाद प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से मृतक कार्यकर्ताओं देबाशीष मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पाल के स्वजन से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। उनके विभागों का आवंटन अभी नहीं हुआ है, लेकिन चयन में बंगाल के भूगोल और सामाजिक ताने-बाने का विशेष ध्यान रखा गया है। दिलीप घोष की पृष्ठभूमि संघ से जुड़ी है तो अग्निमित्रा पाल दक्षिण बंगाल के साथ महिलाओं के बड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। अशोक कीर्तनिया अनुसूचित जाति-मतुआ समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।वहीं, निशिथ प्रमाणिक कूचबिहार के राजबंशी (एससी) चेहरे और खुदीराम टुडू आदिवासी गौरव को स्वर दे रहे हैं। पोशाक में सांस्कृतिक संदेश और सन्यास सा संकल्प सुवेंदु अधिकारी का शपथ ग्रहण के दौरान पहनावा चर्चा का केंद्र रहा।उन्होंने लाल किनारी वाली पारंपरिक सफेद बंगाली धोती के साथ भगवा रंग का आधी आस्तीन का फतुआ (कुर्ता) पहना था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहनावा उनके आरएसएस के प्रति जुड़ाव और सादगीपूर्ण जीवन का संदेश है।आधी आस्तीन का कुर्ता अक्सर संघ के प्रचारकों की पहचान माना जाता है। माथे पर भगवा तिलक लगाकर सुवेंदु ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार ‘बंगाल की संस्कृति’ और ‘राष्ट्रवाद’ के समन्वय पर चलेगी।शपथ लेने के बाद जब सुवेंदु अधिकारी मंचासीन नेताओं का अभिवादन करते हुए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचे तो उन्होंने उनके गले में भगवा दुपट्टा (उत्तरीय) डाला। यह महज एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक और नीतिगत संकेत हैं।भाजपा समर्थक इसे बंगाल में ‘कठोर प्रशासन’ और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं। योगी आदित्यनाथ भाजपा के ‘हिंदुत्व’ के सबसे बड़े पोस्टर ब्वाय हैं, उनका सुवेंदु को भगवा भेंट करना यह दर्शाता है कि बंगाल की नई सरकार तुष्टीकरण की राजनीति को त्यागकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर बढ़ेगी।यह सुवेंदु को ‘बंगाल के योगी’ के रूप में स्थापित करने और राज्य में कानून-व्यवस्था पर जीरो-टालरेंस नीति लागू करने के वैचारिक संकल्प का भी प्रदर्शन है। मुख्यमंत्री सुवेंदु ने अपनी शपथ के बाद सीधे जोरासांको ठाकुरबाड़ी जाकर कविगुरु को नमन किया।साथ ही उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों ‘चित्त जेथा भय शून्य, उच्च जेथा शिर'(जहां चित्त भय से शून्य हो जहां हम गर्व से माथा ऊंचा करके चल सकें) को उद्धृत किया।सियासी नारों के बीच बंगाल की मिट्टी का स्वाद भी ब्रिगेड में घुला रहा। मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान झाडग़्राम में झालमुड़ी खाई थी तब से यह देशभर में विख्यात हो गई है।भाजपा ने समर्थकों के लिए झालमुड़ी, मिष्टी दोई, रसोगुल्ला और मिहीदाना के तीन दर्जन से अधिक विशेष स्टाल लगवाए थे, जहां वहां पहुंचे लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच कोलकाता की गलियों से लेकर मैदान तक ‘जय श्री राम’, ‘भारत माता की जय’ और ‘जय मां दुर्गा’ के उद्घोषों से पूरा आसमान गुंजायमान था।
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74 साल में पहली बार भगवा बंगाल, केंद्र से लेकर राज्यों तक की मौजूदगी ने दिया राष्ट्रीय आयाम
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