नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की धार्मिक या व्यावसायिक गतिविधि पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के हित और क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को देखते हुए बाढ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक/धार्मिक गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाएगा। कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को यमुना सुर घाट पर ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाकर आदेश के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने निर्देश दिया कि डीडीए यह सुनिश्चित करे कि उक्त भूमि पर पार्किंग या किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति न दी जाए, फिर चाहे किसी शुभ अवसर पर नदी को श्रद्धांजलि अर्पित करने आने वाले लोगों की सुविधा के लिए ही क्यों न हो।दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा यमुना अदालत ने उक्त आदेश सुर घाट पर स्थित पार्किंग स्थल के रखरखाव के लिए 2022 में जारी किए गए टेंडर को बहाल करने की मांग वाली सुरेश कुमार की याचिका पर पारित किया। डीडीए और एमसीडी के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन के तहत यह टेंडर जारी किया गया था। रखरखाव कार्य के लिए सुरेश कुमार ने सबसे ऊंची बोली लगाई थी।
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Saturday, June 13
यमुना बाढ़ क्षेत्र में पूजा-पाठ और व्यापार पर पाबंदी, पार्किंग तक पर रोक; दिल्ली हाई कोर्ट ने पलटा एमसीडी का फैसला
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