पटना। पश्चिम एशिया की जंग के बीच पेट्रोल और डीजल की बढ़ी परेशानी के क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi On Petrol) ने दो दिन पहले यह कहा था कि पेट्रोल की खपत को कम करें। यह अपील सभी के लिए थी। इसका असर अब बिहार में सरकार के स्तर पर भी दिखेगा।
मंत्रियों को उनके वाहन के लिए मिलने वाले अनलिमिटेड पेट्रोल की राशनिंग की जाएगी। वैसे अभी इस बारे में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, मगर मंत्रियों को इस बारे में साफ-साफ संदेश दे दिया गया है कि प्रधानमंत्री की अपील का क्या परिणाम सामने आना है। अभी मंत्रियों के लिए यह व्यवस्था है कि उनके काफिले में एक एस्कॉर्ट वाहन रहता है जिस पर उनके सुुरक्षाकर्मी रहते हैं। इसके अतिरिक्त मंत्री की कार के अतिरिक्त उनके आप्त सचिव व अन्य कर्मी के लिए दो-तीन वाहन रहते हैं। संभव है आप्त सचिव व अन्य कर्मियों के लिए जो वाहन रहते हैं उनमें कमी की जाए।
मुख्यमंत्री को छोड़ कुछ अन्य लोगों को भी बड़े कारकेड उपलब्ध हैं। उनमें वाहनों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। कारकेड में दौड़ने वाले वाहनों की संख्या को भी पेट्रोल की खपत कम करने के लिहाज से सीमित करने पर वि्चार चल रहा है। इस बारे में पुलिस महकमे से परामर्श के बाद कोई निर्णय होगा। अफसरों को एक माह में जितना पेट्रोल मिलता है उस पर भी कमी को लेकर मंथन चल रहा है। उप्र सरकार ने विशिष्ट श्रेणी के अधिकारियों का मासिक कोटा 125 लीटर से घटाकर 50 लीटर कर दिया है। संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी का मासिक कोटा 100 लीटर से घटाकर 50 लीटर कर दिया गया है। राज्य सरकार इस निर्णय को देख रही है।
बिहार में प्रविधान
बिहार में मंत्री (भत्ता और यात्रा) नियमावली के तहत यह प्राविधान है कि अगर मंत्री अपनी निजी गाड़ी का उपयोग करता है तो उसे प्रतिदिन 10 लीटर पेट्रोल के बराबर राशि का वाहन भत्ता मिलता है। सरकारी वाहन उपयोग करने पर मंत्रियों के लिए पेट्रोल खपत की कोई सीमा नहीं है। वे अपने आधिकारिक कार्यों के लि्ए आवश्यकतानुसार ईंधन का उपयोग कर सकते हैं।
अफसरों के लिए बिहार इस तरह का इंतजाम
बिहार में सचिव स्तर के अधिकारी को 200 से 300 लीटर प्रति माह पेट्रोल या डीजल का कोटा है। क्षेत्रीय अधिकारियो जैसे एसडीओ, बीडीओ और सीओ को 150 से 200 लीटर पेट्रोल या डीजल उनके वाहन के लिए मिलता है।

