अमरावती। आंध्र प्रदेश सरकार के एक सदस्यीय आयोग ने शनिवार को रिपोर्ट में बताया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने 70 लाख किलोग्राम से ज्यादा घी बिना अनिवार्य गुणवत्ता जांच के खरीदा। यह घी का प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू बनाने में इस्तेमाल हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रशासन की बड़ी विफलता थी, जिसके कारण आपूर्तिकर्ता को मिलावटी घी देने का मौका मिला। अधिकारियों ने सुरक्षा जांच को नजरअंदाज किया और प्रयोगशाला की रिपोर्ट को दबा दिया, जिनमें वनस्पति वसा (वेजिटेबल फैट) की मौजूदगी पाई गई थी।
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी दिनेश कुमार की अध्यक्षता में यह जांच आयोग बनाया था, जब सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट दी थी।रिपोर्ट के अनुसार, टीटीडी के अधिकारियों ने पहले भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के बीटा-सिटोस्टेरोल परीक्षण को अनिवार्य करने की योजना बनाई थी, जिसे 1 जुलाई 2022 से लागू होना था। लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया और आपूर्तिकर्ताओं को छूट दे दी गई। इसके कारण 70 लाख किलो से अधिक घी बिना जरूरी जांच के खरीदा गया।
आयोग ने कहा, यह पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक विफलता थी। निविदा (टेंडर) के नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया और सुरक्षा मानक धीरे-धीरे कमजोर कर दिए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ अहम लैब रिपोर्ट को दबा दिया गया,जिनमें मिलावट की पुष्टि थी, उन्हें और खरीद के फैसले बिना सही निगरानी के लिए गए। जांच में पाया गया कि निविदा समिति के सदस्यों ने बिना पूरी मंजूरी के नियमों में ढील दी और कम कीमत वाली बोलियों को बिना जांच के स्वीकार किया। 2019 में तय किए गए पात्रता नियमों को भी कुछ महीनों में कमजोर कर दिया गया, जिससे कुछ ऐसी कंपनियां भी आपूर्तिकर्तां में शामिल हो गईं, जिनके पास जरूरी उत्पादन क्षमता नहीं थी।
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Saturday, June 13
तिरुपति लड्डू विवाद: जांच आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, बिना परीक्षण के खरीदा गया 70 लाख किलो घी
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