पूर्णिया, १७ मई [।
एक शिक्षक द्वारा मैट्रिक की परीक्षा में थर्ड डिवीजन होने के बाद भी सेकेंड डिवीजन का फर्जी प्रमाण पत्र देकर 23 वर्षों तक नौकरी करने और वेतन मद में लाखों की राशि का उठाव करने का मामला पकड़ में आया है।निगरानी द्वारा आरोपित शिक्षक के प्रमाण पत्र के सत्यापन के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि शिक्षक सचिंद्र सिंह ने शिक्षक की नौकरी के लिए जो मैट्रिक का अंक पत्र सेकेंड डिवीजन का दिया था, वह फर्जी है।वे मैट्रिक की परीक्षा में सेंकेड डिवीजन के बजाय थर्ड डिवीजन से पास हुए थे। मामला पकड़ में आने के बाद आरोपित शिक्षक के खिलाफ सरसी थाना में निगरानी विभाग के पुलिस उपाधीक्षक श्रीराम चौधरी द्वारा प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी है। सचिंद्र सिंह वर्ष 2003 से शिक्षक के पद पर पदस्थापित रहे हैं और उनके द्वारा वेतन मद में लाखों की राशि का उठाव किया गया है। विभाग अब फर्जीवाड़ा करने वाले इस आरोपित शिक्षक से वेतन मद में भुगतान की गयी राशि वसूल करने की तैयारी में है। उच्च न्यायालय बिहार, पटना के सीडब्लूजेसी संख्या 15459/14 के आलोक में निगरानी जांच संख्या बीएस-08/15 के तहत नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों एवं नियोजन में हुई अनियमितता की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना द्वारा की जा रही है। इसी के तहत नियोजित पंचायत शिक्षक सचिंद्र सिंह, मध्य विद्यालय कचहरी बलुआ, मधेपुरा टोला प्रखंड-बनमनखी, जिला पूर्णियां का नियोजन वर्ष 2003 में अप्रशिक्षित शिक्षक के रूप में हुआ था। नियोजित पंचायत शिक्षक सचिंद्र सिंह का मध्यमा का अंक-पत्र व प्रमाण-पत्र प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, बनमनखी, पूर्णिया द्वारा उपलब्ध कराया गया।इसे सत्यापन के लिए बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना भेजा गया जिसमें उनके रोल नंबर-29, रोल कोड-32, प्राप्तांक 422, श्रेणी द्वितीय, वर्ष 1987 अंक पत्र कमांक-24630 दर्ज था।बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना के संचिका संख्या- 05/परीक्षा , वी पीयूआर 5087/2021, पत्रांक-560/पटना, दिनांक 15.12.2022 के द्वारा मध्यमा का सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ।बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा नियोजित पंचायत शिक्षक सचिंद्र सिंह के मध्यमा अंक-पत्र पर वर्ष 1987 कुल प्राप्तांक 422 के स्थान पर 322 श्रेणी-द्वितीय के स्थान पर तृतीय, एवं अंक पत्र के प्राप्तांक में भिन्नता एवं अंक-पत्र फेंक अंकित कर वापस किया गया।संस्कृत बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया है कि जो शिक्षक पद के लिए अंक पत्र प्रस्तुत किया गया है, वह पूरी तरह से फर्जी है और इस तरह का कोई अंक पत्र संस्कृत बोर्ड से जारी नहीं किया गया है।दर्ज प्राथमिकी में निगरानी विभाग ने कहा कि अब तक के जांच एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के अवलोकन से यह तथ्य प्रकाश में आया है कि नियोजित पंचायत शिक्षक सचिंद्र सिंह, मध्य विद्यालय कचहरी बलुआ, मधेपुरा, टोला प्रखंड-बनमनखी जिला पूर्णिया ने अपने मध्यमा का फर्जी व कूटरचित अंक पत्र असली मध्यमा का अंक पत्र के रूप में उपयोग कर आपराधिक षड्यंत्र के तहत धोखाधड़ी से पंचायत शिक्षक के रूप में अपना नियोजन कराया है। यह एक संज्ञेय एवं दंडनीय अपराध है। सिंह के खिलाफ धारा-420/468/471/120 (बी) भा0द0वि0 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है।
संस्कृत बोर्ड की परीक्षा में शिक्षक सचिंद्र सिंह को 322 अंक मिला था, लेकिन इस अंक पत्र में फर्जीवाड़ा कर उसे 422 अंक बनाकर प्रस्तुत किया गया। अंक के अलावा थर्ड डिवीजन से पास होने वाले गुरूजी ने फर्जीवाड़ा कर सेकेंड डिवीजन कर लिया, जो अब उनके गले का फांस बन गया है।जांच में शिक्षक का प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद सरसी थाना में शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी है। शिक्षक ने सेकेंड डिवीजन मैट्र्कि पास करने का प्रमाण पत्र दिया था मगर सत्यापन में वे थर्ड डिवीजन पास मिले है। -श्रीराम चौधरी, पुलिस उपाधीक्षक सह जांचकर्ता, निगरानी विभाग, पटना।
Wednesday, May 20
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