नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल, गैस, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का संयम से इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों का संयम से इस्तेमाल करना समय की मांग है। इस वैश्विक संकट के समय हमें कुछ संकल्प लेने होंगे। देशभक्ति का अर्थ केवल देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देना ही नहीं है, बल्कि इस कठिन समय में जिम्मेदारी से जीना और देश के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी है।
तेलंगाना में लगभग 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का डिजिटली शिलान्यास एवं उद्घाटन करने और भाजपा की एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने रविवार को कहा कि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।
PM मोदी के 9 सुझाव
1. पेट्रोल-डीजल
पीएम ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सौर ऊर्जा के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है और पेट्रोल में एथनाल मिश्रण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। पहले सरकार एलपीजी की सौ प्रतिशत कवरेज पर केंद्रित थी, लेकिन अब इसका ध्यान पाइपलाइन के जरिये गैस की किफायती आपूर्ति पर है।
2. मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग
सरकार सीएनजी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रही है। इन सभी प्रयासों से ही भारत दुनियाभर में जारी बड़े ऊर्जा संकट का प्रभावी ढंग से सामना कर रहा है। जनता ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने का आग्रह करते हुए मोदी ने कहा कि जहां उपलब्ध हो, वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
3. कार-पूलिंग का विकल्प
जब निजी वाहनों का उपयोग जरूरी हो, तो कार-पूलिंग का विकल्प आजमाएं। सामान की आवाजाही के लिए रेलवे को प्राथमिकता दें।
4. इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग
जहां संभव हो, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाएं। स्वच्छ मोबिलिटी के विकल्पों पर जोर देते हुए, PM मोदी ने उन नागरिकों से आग्रह किया जिनके पास इलेक्ट्रिक वाहन हैं, कि वे उनका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के व्यापक प्रयासों के तहत, EV को अपनाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। PM मोदी ने अनुरोध किया, “जिन लोगों के पास इलेक्ट्रिक वाहन हैं, उन्हें उनका जितना हो सके, उतना इस्तेमाल करने की कोशिश करनी चाहिए।”
5. वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग
उन्होंने राष्ट्र हित में कोविड-काल में अपनाए गए उपायों को फिर शुरू करने का आह्वान किया, जिनमें वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग शामिल हैं।
6. विदेशी मुद्रा भंडार बचाएं
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से विदेशी मुद्रा बाहर जाने के प्रति सचेत रहते हुए ”रुपये के संरक्षक” के रूप में कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने जनता से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए अनावश्यक विदेश यात्राओं, विदेशों में छुट्टियां मनाने और विदेशों में होने वाली शादियों से बचने की अपील की।
7. घरेलू पर्यटन को बढ़ावा
उन्होंने कहा कि देशवासी घरेलू पर्यटन और भारत में ही उत्सव मनाने को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान व्यापक रूप से इस्तेमाल की गई ऐसी प्रणालियां, मौजूदा वैश्विक संकट में भी प्रासंगिक बनी हुई हैं।
8. सोने की अनावश्यक खरीदारी से बचें
एक वर्ष तक सोने की अनावश्यक खरीदारी से बचें, ताकि विदेशी मुद्रा बाहर जाने का दबाव कम हो। साथ ही देश में निर्मित और स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। इन उत्पादों में जूते और बैग जैसी रोजमर्रा की चीजें शामिल हैं।
9. सौर-ऊर्जा, प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि घरों में खाने के तेल की खपत कम करें, इससे देश की आर्थिक सेहत के साथ-साथ व्यक्तिगत सेहत को भी फायदा होगा। प्रधानमंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि वे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 50 प्रतिशत तक कम करें, प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाएं। किसान मिट्टी की सेहत की रक्षा करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करें। साथ ही डीजल के बजाय सौर-ऊर्जा से चलने वाले ¨सचाई पंपों को अधिक से अधिक अपनाएं।
विकास के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए- पीएम मोदी
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की इस टिप्पणी का जिक्र करते हुए कि विकास के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए, मोदी ने कहा कि वह भी राजनीतिक टिप्पणियों से परहेज करेंगे। तेलंगाना को केंद्र सरकार के सहयोग का आश्वासन देते हुए उन्होंने रेड्डी को विकास की इस यात्रा में उनके साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
पेट्रोलियम कंपनियों को रोजाना हो रहा 1,700 करोड़ रुपये का नुकसान
पश्चिम एशिया संकट सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों पर भारी पड़ रहा है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां पिछले 10 सप्ताह से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पुराने दामों पर कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन 1,600-1,700 करोड़ रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है। सूत्रों ने बताया कि 10 सप्ताह में इन कंपनियों को कुल एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।

