तेहरान, 0२ मई ।
करीब 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद भले ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान की सैन्य ताकत को बुरी तरह कमजोर करने के दावे किए हों, लेकिन अब तस्वीर कुछ अलग दिख रही है। ईरान अब भी अमेरिकी-इजरायली हमलों के प्रति सशंकित है और तेजी से तैयारी कर रहा है।अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने हमलों में मलबेके नीचे दबे अपने अहम हथियार भंडार को फिर से निकालकर सक्रिय करना शुरू कर दिया है। उधर, अमेरिका ने इजरायल को करीब 6500 टन हथियारों की नई खेप भेजी है और ईरान पर नए हमले की तैयारी को लेकर समीक्षा भी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ट्रंप को ईरान पर पहली बार हाइपरसोनिक मिसाइल हमले के विकल्प सुझाए। युद्ध की तैयारी के साथ-साथ वार्ता को भी आगे बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। तेहरान ने पाकिस्तान के जरिये अमेरिका को शांति समझौते के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है। बता दें कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीत शांति वार्ता के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत गिरकर 109 डालर तक नीचे आ गई। जिन भूमिगत ठिकानों पर भारी बमबारी कर उन्हें पूरी तरह नष्ट करने का दावा किया गया था, वहां से ईरान ने हथियारों को बाहर निकालकर दोबारा तैनात करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी और दो अन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईरान मौजूदा युद्धविराम का इस्तेमाल तेजी से अपनी ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं को फिर से खड़ा करने में कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि इन प्रयासों के पीछे मकसद साफ है- अगर हालात फिर बिगड़ते हैं, तो ईरान जल्द से जल्द जवाबी हमले के लिए तैयार रहना चाहता है।एएनआइ के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को लेकर अपना नया प्रस्ताव पाकिस्तान को सौंप दिया है। इस प्रस्ताव का मुख्य फोकस होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही बहाल करने पर है। पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि उनका सबसे बड़ा मकसद युद्ध खत्म करना और लंबे समय तक शांति कायम करना है। ईरान का कहना है कि वह बातचीत के जरिए हालात को बेहतर करना चाहता है और शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, अमेरिकी रुख इस पर सख्त नजर आ रहा है और इसकी संभावना कम है कि ट्रंप इस प्रस्ताव को मंजूरी देंगे।
व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सैन्य अधिकारियों के बीच करीब 45 मिनट तक बैठक चली। बैठक में सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर और ज्वाइंट चीफ्स आफ स्टाफ के चेयरपर्सन ने ट्रंप को ईरान पर हमले से जुड़ी अपनी नई योजना के बारे में जानकारी दी। एक्सियोस के अनुसार, ईरान को समझौते को तैयार करने के लिए छोटा लेकिन ताकतवर हमला किया जा सकता है। इसमें बुनियादी ढांचों के अलावा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा, होर्मुज के कुछ हिस्सों पर कब्जा करके उसे व्यावसायिक जहाजों के लिए दोबारा खोलने पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम के स्टाक पर कब्जा करने के लिए स्पेशल फोर्सेज का आपरेशन चलाने पर भी बात हुई।एपी के अनुसार, अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल के भी हाथ मजबूत कर रहा है। बीते 24 घंटे में इजरायल को 6500 टन हथियार और सैन्य उपकरण का जखीरा भेजा गया है।इसमें हवाई औऱ जमीनी हमलों के लिए गोला-बारूद, सैन्य ट्रक, ज्वाइंट लाइट टैक्टिकल वेहिकल और अन्य उपकरण शामिल हैं। 28 फरवरी के बाद से अब तक इजरायल को 1,15,600 टन से ज्यादा सैन्य उपकरण भेजे जा चुके हैं। इनको कार्गो जहाज और कई विमानों के जरिये इजरायल पहुंचाया गया है।रॉयटर के अनुसार, ईरान में शुक्रवार को अचानक एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कदम संदिग्ध छोटे विमानों और निगरानी ड्रोन की मौजूदगी के जवाब में उठाया गया।तस्नीम और फार्स न्यूज एजेंसियों के हवाले से एएफपी ने बताया कि राजधानी के कुछ हिस्सों में करीब 20 मिनट तक एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहा। इस दौरान अज्ञात छोटे विमान और टोही ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें निष्क्रिय करने की कोशिश की गई। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हो गई और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने ईरान युद्ध की मंजूरी के लिए संसद में प्रस्ताव रखने का इरादा अभी टाल दिया है। युद्ध के 60 दिन का समय पूरा होने के बाद इसे जारी रखने के लिए एक मई को प्रस्ताव रखा जाना था। वार पावर एक्ट के तहत सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है, जिसकी समय सीमा नजदीक मानी जा रही है।व्हाइट हाउस का कहना है कि मौजूदा युद्धविराम ने इस 60 दिन की कानूनी समय-सीमा को फिलहाल “रोक” दिया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को संसद में कहा कि राष्ट्रपति को 60 दिन से ज्यादा युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि ईरान के साथ जो युद्धविराम हुआ है, उससे यह 60 दिन की समय सीमा रुक गई है।अमेरिका-ईरान जंग सात अप्रैल को रुक गया था। इसका मतलब है कि यह लड़ाई करीब 40 दिन चली। हेगसेथ ने यह भी कहा कि इस समय सबसे बड़ा खतरा ईरान नहीं, बल्कि युद्ध विरोधी हैं। इनमें कुछ डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन हैं।
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युद्ध की आहट: ईरान ने मलबे से निकाले हथियार, ट्रंप की नई सैन्य योजना तैयार?
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