कोरबा। जिले के कटघोरा वनमंडल में हाथी समस्या कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। यहां के जटगा रेंज में 48 की संख्या में हाथी मौजूद हैं। हाथियों ने क्षेत्र में स्थित मेड़उड़ पहाड़ को बसेरा बना लिया है। जिनमें से 17 हाथी काफी उत्पाती श्रेणी के हैं। ये हाथी हर रोज झुंड से अलग होकर पहाड़ से नीचे उतरते हैं और कभी जटगा तो कभी धोबघट गांव में पहुंचकर वहां ग्रामीणों द्वारा बाड़ी में लगाए गए सब्जी के पौधों तथा खेत में धान की रबी फसल को नुकसान पहुंचाने के बाद वापस पहाड़ पर चढ़ जाते हैं। यह सिलसिला विगत एक पखवाड़े से चल रहा है। हाथियों के उत्पात से क्षेत्र के ग्रामीण काफी हलाकान है। वहीं वन अमला भी उत्पात को रोकने में असफल साबित हो रहा है। बीती रात झुंड में शामिल उत्पाती हाथी पहाड़ से फिर नीचे उतर गए और धोबघट गांव में एक ग्रामीण के खेत में प्रवेश कर वहां लगे धान की फसल को बुरी तरह रौंद दिया। हाथियों का उत्पात रात भर चला। सुबह होने से पहले हाथी वापस लौट गए और पहाड़ पर चढक़र वहां अपने झुंड में पुन: शामिल हो गए। पीडि़त ग्रामीण द्वारा सूचना दिए जाने पर वन विभाग का अमला आज सुबह मौके पर पहुंचा और रात में हाथियों द्वारा किए गए नुकसानी का आंकलन करने के साथ रिपोर्ट तैयार की।
इधर कोरबा वनमंडल के कुदमुरा रेंज में भी दंतैल हाथी की दहशत बनी हुई है। दंतैल हाथी दो दिनों तक गीतकुंआरी के जंगल में डेरा डालने के बाद बीती रात कलमीटिकरा पहुंच गए और यहां के जंगल के कक्ष क्रमांक 1108 में डेरा डाल दिया है। दंतैल हाथी के क्षेत्र में आने से ग्रामीण दहशत में हैं वहीं वन अमला उसकी निगरानी में जुट गया है। कलमीटिकरा व आसपास के गांव में मुनादी कराई जा रही है।
Wednesday, May 20
जटगा रेंज में मौजूद गजदल में है 17 उत्पाती हाथी
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