जांजगीर-चांपा। अकलतरा क्षेत्र में शाम करीब 4.15 बजे 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन बाधित होते ही प्लांट की 1800 मेगावाट क्षमता वाली तीनों यूनिट एक साथ ट्रिप कर गईं। पूरे संयंत्र में अचानक ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। बायलर सेक्शन से तेज आवाजें आने लगीं, जिससे कर्मचारियों के बीच दहशत फैल गई। उत्पादन, कंट्रोल सिस्टम और आंतरिक गतिविधियां तत्काल प्रभावित हो गईं। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि नरियरा से करीब आठ किलोमीटर दूर हाईटेंशन ट्रांसमिशन टावर गिरने से पावर ग्रिड फेल हुआ और पूरा संयंत्र अंधेरे में डूब गया।
जेएमपीसीएल से निकलने वाली 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से विद्युत आपूर्ति पावर ग्रिड कार्पोरेशन लिमिटेड (पीजीसीएल) के तागा सब स्टेशन तक पहुंचाई जाती है। इसी इंटरकनेक्टेड ग्रिड से कई राज्यों को बिजली सप्लाई की जाती है। मंगलवार शाम तेज आंधी के दौरान हाईटेंशन टावर के धराशायी होते ही ग्रिड अस्थिर हो गया और सुरक्षा प्रणाली सक्रिय होने से प्लांट की तीनों यूनिट स्वत: ट्रिप कर बंद हो गईं। यूनिट बंद होने के बाद बायलर और टर्बाइन सेक्शन में दबाव परिवर्तन के कारण तेज कंपन और आवाजें सुनाई देने लगीं।
अचानक आई इस तकनीकी स्थिति से कर्मचारियों और आपरेशन स्टाफ में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बिजली उत्पादन बंद होने से संयंत्र की संपूर्ण गतिविधियां प्रभावित हो गई हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार 400 केवी टावर की मरम्मत और लाइन पुनस्र्थापना में पांच से सात दिन लग सकते हैं। जब तक ग्रिड स्थिर नहीं होता, तब तक प्लांट का पूर्ण क्षमता से संचालन संभव नहीं माना जा रहा है। इस घटना ने क्षेत्रीय पावर ट्रांसमिशन सिस्टम की संवेदनशीलता और मौसमीय आपदाओं के बीच विद्युत संरचना की चुनौती को भी उजागर कर दिया है।400 केवी ट्रांसमिशन लाइन विद्युत उत्पादन संयंत्र और राष्ट्रीय ग्रिड के बीच मुख्य कड़ी मानी जाती है। नरियरा क्षेत्र में टावर गिरते ही ग्रिड का लोड संतुलन बिगड़ गया। सुरक्षा मानकों के तहत जेएमपीसीएल की तीनों यूनिटें स्वत: ट्रिप कर गईं। इसे तकनीकी भाषा में ग्रिड फेल्योर आधारित ब्लैकआउट कहा जाता है। इस स्थिति में उत्पादन इकाइयों को सुरक्षित रखने के लिए बिजली उत्पादन तत्काल रोक दिया जाता है।
जेएमपीसीएल से उत्पादित बिजली पीजीसीआई नेटवर्क के जरिए विभिन्न राज्यों तक पहुंचती है। 400 केवी लाइन बंद रहने से वैकल्पिक ग्रिड प्रबंधन का दबाव बढ़ सकता है। यदि जल्द बहाली नहीं हुई तो पीक डिमांड अवधि में लोड मैनेजमेंट और सप्लाई संतुलन बनाए रखना बिजली कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तकनीकी सूत्रों के मुताबिक हाईटेंशन टावर दोबारा खड़ा करने, लाइन स्ट्रिंगिंग और ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन की प्रक्रिया जटिल होती है। इसके लिए भारी मशीनरी, सुरक्षा निरीक्षण और लोड टेस्टिंग की जरूरत पड़ती है। अनुमान है कि पूरी व्यवस्था सामान्य होने में पांच से सात दिन लग सकते हैं। तब तक प्लांट में उत्पादन पूरी तरह बंद रहने की आशंका बनी हुई है।
What's Hot
Saturday, June 13
400 केवी टावर फेल होने के साथ ग्रिड पर खतरा, आपूर्ति से जुड़े कुछ राज्यों में बिजली की सुविधा को लेकर संशय
Related Posts
Add A Comment
About Us
Editor & Publisher: Manoj Shukla
Co-Editor: Mohammad Shah Aalam
Office Address:
VV Vihar Colony, Street No. 07,
Mova, Raipur, Chhattisgarh – 492001
India
Important pages
© 2026 News India Live 36.

