नईदिल्ली, 0३ मई ।
पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान सऊदी अरब और यूएई के मध्य बढ़ रहे तनाव के बीच पीएम नरेन्द्र मोदी की इस महीने होने वाले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा की अहमियत काफी बढ़ गई है। यह यात्रा संक्षिप्त होगी क्योंकि मोदी की इस महीने (15-20 मई) यूरोपीय देशों नार्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स और इटली की यात्रा के दौरान यूएई में एक संक्षिप्त ठहराव की संभावना है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इस बारे में विमर्श चल रहा है कि भले ही यह यात्रा कुछ घंटे की हो, लेकिन इस दौरान द्विपक्षीय सहयोग से जुड़ी कुछ अहम घोषणाएं हों। मोदी वहां यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ मिलकर दीर्घकालिक रणनीतिक समझौतों की घोषणा कर सकते हैं। राष्ट्रपति नाहयान जनवरी 2026 में एक दिन की यात्रा पर नई दिल्ली आए थे और दोनों नेताओं ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के फ्रेमवर्क समझौते के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
सूत्रों के अनुसार, यह भारत का किसी भी पश्चिम एशियाई देश के साथ किया गया सबसे बड़ा रणनीतिक समझौता होगा। दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है और मोदी की इस यात्रा को सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। यमन मुद्दे को लेकर सऊदी अरब और यूएई के बीच विवाद ईरान युद्ध के दौरान और बढ़ गया है।
यूएई का मानना है कि ईरान की तरफ से होने वाले हमलों से बचाव के लिए सऊदी अरब ने अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। यूएई ने तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक से बाहर निकलकर वैश्विक तेल अर्थव्यवस्था में सऊदी अरब के वर्चस्व को चुनौती दी है। यूएई अब अमेरिका-इजरायल के साथ निकटता बढ़ा रहा है और भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है, जबकि सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत कर रहा है। इस बदलते माहौल में पीएम मोदी की संभावित यूएई यात्रा पर कई देशों की नजर होगी। मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है।भारत पहले से ही यूएई का एक बड़ा तेल खरीदार ओपेक और ओपेक प्लस (रूस जैसे कुछ अन्य देश सदस्य) समूह से बाहर निकलने के बाद संकेत हैं कि यूएई अपने कच्चे तेल के उत्पादन में भारी वृद्धि करने की तैयारी कर रहा है।दूसरी ओर, भारत भी एक बड़े विश्वसनीय तेल आपूर्तिकर्ता देश की तलाश में है। वर्तमान में, भारत रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहा है लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध का खतरा हमेशा बना रहता है।एक दशक पहले, भारत ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदता था जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण छोडऩा पड़ा था। भारत पहले से ही यूएई का एक बड़ा तेल खरीदार है, लेकिन नए समीकरण में खरीद की मात्रा काफी बढ़ सकती है। यूएई पर अमेरिकी प्रतिबंध का डर नहीं है और वहां से तेल भारत लाने की लागत भी कम है।
Wednesday, May 20
दीर्घकालिक रणनीतिक समझौते पर मुहर लगाने की तैयारी, पीएम मोदी का हो सकता है यूएई दौरा
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